कुछ मूलभूत तैयारी की जा रही है।
अ) पंडित जी के एक परिचित संत हैं। उन्होंने भारत के लगभग सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन किए हैं। पंडित जी उन से जानकारी ले रहे हैं।
ब) मार्ग पर आने वाले सभी रिश्तेदार एवं परिचितों के पते / फ़ोन नम्बर जांचे जा रहे हैं, उनका संकलन करना शुरू किया है। आवश्यकता आने पर सहायता ली जा सकती है
स) मुझे एक ऐसे बैंक में खता खोलना है जिसकी शाखाएं अधिक हों। SBI ही सूझता है। फिर केवल एक ATM कार्ड से काम चल जायेगा। ऐसे में ही CITIGOLD relationship की निरर्थकता पता चलती है।
Shree Jyotirlinga Yatra
Three friends and a driver, get on a journey to the seven Jyotirlings in Gujarat, MP, Maharashtra and Ekling ji.
Saturday, July 19, 2008
यात्रा योजना
यात्रा की रूप रेखा लगभग बन सी गई है।
दिल्ली से चलेंगे।
मार्ग होगा दिल्ली --> आगरा --> ग्वालियर --> शिवपुरी --> उज्जैन (श्री महाकालेश्वर धाम) (शिवपुरी से उज्जैन का मार्ग अभी स्पष्ट नहीं है मुझे) --> श्री ॐकारेश्वर (इंदौर खंडवा के बीच में हैं, कुछ रिश्तेदार हैं, उनसे पूछना है) --> जलगाँव --> अजंता --> एल्लोरा --> श्री घ्रुननेश्वर धाम (निकट औरंगाबाद) --> पुणे --> श्री भीमाशंकर धाम (पुणे नासिक के बीच में) --> श्री त्र्यम्बकेश्वर धाम ( नासिक में) --> नासिक --> सूरत (मेरे मौसेरे भाई रहते हैं) --> कर्णावती (अमदावाद) (लोथल में सिन्धु सभ्यता का संग्रहालय देख कर) --> राजकोट --> वेरावल (श्री सोमनाथ धाम) --> श्री द्वारका धाम --> जामनगर --> Golden Quadrilateral से उदयपुर (एकलिंगजी के दर्शन ) --> पुष्कर --> दिल्ली
प्रति दिन ४०० किलोमीटर ही चलेंगे। सूर्यास्त के समय जहाँ होंगे वहां रुक जायेंगे।
अभी तो यही सोच है।
इति
दिल्ली से चलेंगे।
मार्ग होगा दिल्ली --> आगरा --> ग्वालियर --> शिवपुरी --> उज्जैन (श्री महाकालेश्वर धाम) (शिवपुरी से उज्जैन का मार्ग अभी स्पष्ट नहीं है मुझे) --> श्री ॐकारेश्वर (इंदौर खंडवा के बीच में हैं, कुछ रिश्तेदार हैं, उनसे पूछना है) --> जलगाँव --> अजंता --> एल्लोरा --> श्री घ्रुननेश्वर धाम (निकट औरंगाबाद) --> पुणे --> श्री भीमाशंकर धाम (पुणे नासिक के बीच में) --> श्री त्र्यम्बकेश्वर धाम ( नासिक में) --> नासिक --> सूरत (मेरे मौसेरे भाई रहते हैं) --> कर्णावती (अमदावाद) (लोथल में सिन्धु सभ्यता का संग्रहालय देख कर) --> राजकोट --> वेरावल (श्री सोमनाथ धाम) --> श्री द्वारका धाम --> जामनगर --> Golden Quadrilateral से उदयपुर (एकलिंगजी के दर्शन ) --> पुष्कर --> दिल्ली
प्रति दिन ४०० किलोमीटर ही चलेंगे। सूर्यास्त के समय जहाँ होंगे वहां रुक जायेंगे।
अभी तो यही सोच है।
इति
श्री रुद्राष्टकम
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा विरचित "श्री रुद्राष्टकम", श्री राम चरित मानस में है। ऐसी मान्यता है की श्री रुद्राष्टकम के पाठ से संताप का नाश होता एवं मानसिक शान्ति प्राप्त होती है।
यह मेरा अनुभूत प्रयोग भी है। २००५ के दौरान एक समय आया जब लगा की जीवन के हर पहलु में ही समस्यायें आने लगीं। मेरे पिताजी एवं हमारे परिवार के हितैषी और मित्र डॉ श्रीकांत एकबोटे ने मुझे सलाह दी में नित्य श्री शिवजी का माला जाप एवं पाठ करुँ ।
मुझे आशातीत परिणाम मिले, एवं मेरा मानसिक संतुलन बना रहा, ऐसी प्रभु कृपा मुझ पर हुई।
हमारे परिवार में वैष्णव परम्परा चली आ रही है। मैंने अपने पिताजी को, दादाजी को सदैव श्री कृष्ण पूजा करते ही देखा है। एकबोटे अंकल के कहने से पहले, मैं श्री शिवजी की पूजा अर्चना नहीं करता था। मतलब, मन्दिर इत्यादि में तो करता था पर घर पर नहीं।
मेरी बुद्धि छोटी है। उसका ही दोष है।
श्री शिवजी की आरती में एक पंक्ति आती है,
"ब्रह्म विष्णु सदाशिव, जानत अविवेका,
प्रणव अक्षर के मध्ये, ॐ अक्षर के मध्ये , यह तीनो एका"
इस पंक्ति से मेरी बुद्धि का यह दोष जाता रहा।
नीचे एक लिंक दे रहा हूँ, जिसके माध्यम से आप श्री रुद्राष्टकम एवं अंग्रेजी अनुवाद पढ़ सकते हैं.
http://www.stutimandal.com/gif_tulsi/rudrashtakam.htm
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यह मेरा अनुभूत प्रयोग भी है। २००५ के दौरान एक समय आया जब लगा की जीवन के हर पहलु में ही समस्यायें आने लगीं। मेरे पिताजी एवं हमारे परिवार के हितैषी और मित्र डॉ श्रीकांत एकबोटे ने मुझे सलाह दी में नित्य श्री शिवजी का माला जाप एवं पाठ करुँ ।
मुझे आशातीत परिणाम मिले, एवं मेरा मानसिक संतुलन बना रहा, ऐसी प्रभु कृपा मुझ पर हुई।
हमारे परिवार में वैष्णव परम्परा चली आ रही है। मैंने अपने पिताजी को, दादाजी को सदैव श्री कृष्ण पूजा करते ही देखा है। एकबोटे अंकल के कहने से पहले, मैं श्री शिवजी की पूजा अर्चना नहीं करता था। मतलब, मन्दिर इत्यादि में तो करता था पर घर पर नहीं।
मेरी बुद्धि छोटी है। उसका ही दोष है।
श्री शिवजी की आरती में एक पंक्ति आती है,
"ब्रह्म विष्णु सदाशिव, जानत अविवेका,
प्रणव अक्षर के मध्ये, ॐ अक्षर के मध्ये , यह तीनो एका"
इस पंक्ति से मेरी बुद्धि का यह दोष जाता रहा।
नीचे एक लिंक दे रहा हूँ, जिसके माध्यम से आप श्री रुद्राष्टकम एवं अंग्रेजी अनुवाद पढ़ सकते हैं.
http://www.stutimandal.com/gif_tulsi/rudrashtakam.htm
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Friday, July 18, 2008
कुछ मूलभूत बातें
हम लोगों ने यात्रा के सम्बन्ध में कुछ मूलभूत बातें तय की हैं।
पहली यह की ठहरना धर्मशाला / सामुदायिक भवन / स्थानीय परिवार के साथ ही है। मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्वयंसेवक हूँ, "भारत" से जुड़ने जा रहा हूँ। होटल में तो कार्यवश ठहरता ही हूँ, अब भी होटल में ठहर कर "इंडिया" वासी नहीं रहना चाहता।
पहली यह की ठहरना धर्मशाला / सामुदायिक भवन / स्थानीय परिवार के साथ ही है। मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्वयंसेवक हूँ, "भारत" से जुड़ने जा रहा हूँ। होटल में तो कार्यवश ठहरता ही हूँ, अब भी होटल में ठहर कर "इंडिया" वासी नहीं रहना चाहता।
यही बात भोजन के सम्बन्ध में भी है। यथा सम्भव, स्थानीय भोजन ही करें, ऐसी सोच है।
वेशभूषा - तीनो मित्र धोती कुरता ही पहनेंगे, यह सोचा है। मुझे और पंडितजी को तो धोती बाँधने का अभ्यास है, पर बोहरा जी ने यज्ञोपवित संस्कार के बाद कभी धोती पहनी हो, ऐसा उन्हें ध्यान नहीं है। उन्हें धोती बांधना सिखाने का दायित्व पंडितजी ने लिया है। :-) यह तो फोटो खींचने लायक है.
आगे हरी इच्छा / हरी कृपा
कुछ और निर्णय
गाड़ी कौन सी ली जाए।
होंडा सिविक चलने में बहुत अच्छी है, comfortable है, पीछे बैठने में आनंद है। सुरक्षा की दृष्टि से, airbags हैं, बड़ी गाड़ी होने से दुर्घटना होने पर सवारी के बचने की संभावना अधिक होती है। गाड़ी चलने में थकान नहीं होती।
किंतु, हर जगह मिकैनिक नही है। और यदि इलेक्ट्रिकल सम्बंधित कुछ समस्या हो जाए तो काफ़ी कठिनाई है। हमारे साथ हो चुका है, शीशे चोरी हुये तो AC ने चलना बंद कर दिया।
ह्युंदै वेरना भी अच्छी है, डीजल की है और एवरेज भी अच्छी है। पर सिविक वाली बात नहीं है। पर सर्विस केन्द्र कहीं अधिक मात्रा में हैं।
टाटा इंडिगो की मरम्मत गली कूचे में हो जाती है। पर गाड़ी चलने में आपकी मरम्मत हो जाती है। एवरेज अच्छा देती है, और ऐसा नहीं हैं की उसे देख कर लोग आपकी और आकर्षित हों।
ह्युंदै वेरना का ही मानस बन रहा है।
होंडा सिविक चलने में बहुत अच्छी है, comfortable है, पीछे बैठने में आनंद है। सुरक्षा की दृष्टि से, airbags हैं, बड़ी गाड़ी होने से दुर्घटना होने पर सवारी के बचने की संभावना अधिक होती है। गाड़ी चलने में थकान नहीं होती।
किंतु, हर जगह मिकैनिक नही है। और यदि इलेक्ट्रिकल सम्बंधित कुछ समस्या हो जाए तो काफ़ी कठिनाई है। हमारे साथ हो चुका है, शीशे चोरी हुये तो AC ने चलना बंद कर दिया।
ह्युंदै वेरना भी अच्छी है, डीजल की है और एवरेज भी अच्छी है। पर सिविक वाली बात नहीं है। पर सर्विस केन्द्र कहीं अधिक मात्रा में हैं।
टाटा इंडिगो की मरम्मत गली कूचे में हो जाती है। पर गाड़ी चलने में आपकी मरम्मत हो जाती है। एवरेज अच्छा देती है, और ऐसा नहीं हैं की उसे देख कर लोग आपकी और आकर्षित हों।
ह्युंदै वेरना का ही मानस बन रहा है।
Thursday, July 17, 2008
राह पकड़ तू एक चला चल.........
मदिरालय जाने को घर से,
चलता है पीने वाला,
किस पथ से जाऊं,
असमंजस में है वह भोला भाला,
अलग अलग पथ बतलाते सब,
पर में यह बतलाता हूँ,
राह पकड़ तू एक चला चल,
पा जाएगा मधुशाला........
सुन कल कल छल छल,
मधु घट से गिरती,
प्यालों में हाला,
सुन रन झुन .................
निर्णय और निर्णय
ऊहापोह की स्तिथी !!
कुछ निर्णय लेने हैं।
यात्रा उदयपुर से आरम्भ करें या फिर दिल्ली से।
यदि दिल्ली से करें, तो उज्जैन का मार्ग क्या हो। कुछ ट्रक वालों से पूछता हूँ की, शिवपुरी के बाद, उज्जैन तक की सड़क कैसी है.
कुछ निर्णय लेने हैं।
यात्रा उदयपुर से आरम्भ करें या फिर दिल्ली से।
यदि दिल्ली से करें, तो उज्जैन का मार्ग क्या हो। कुछ ट्रक वालों से पूछता हूँ की, शिवपुरी के बाद, उज्जैन तक की सड़क कैसी है.
Wednesday, July 16, 2008
Some good sites for travel
Relating to Shree Jyotirling
http://en.wikipedia.org/wiki/Bhimashankar
http://en.wikipedia.org/wiki/Jyotirlingas#The_twelve_Jyotirlingas_in_India
http://www.simhastha.nic.in/mahakaleshwar/jyotirling.htm
Relating to Travel
http://www.indianrail.gov.in/inet_metro_trns.html
http://www.morth.nic.in/
http://www.nhai.org/
Useful Tools
http://www.wikimapia.org/
http://en.wikipedia.org/wiki/Bhimashankar
http://en.wikipedia.org/wiki/Jyotirlingas#The_twelve_Jyotirlingas_in_India
http://www.simhastha.nic.in/mahakaleshwar/jyotirling.htm
Relating to Travel
http://www.indianrail.gov.in/inet_metro_trns.html
http://www.morth.nic.in/
http://www.nhai.org/
Useful Tools
http://www.wikimapia.org/
बोल बम, बम बम
!! जय श्री कृष्ण !!
मेरा नाम भरत जोशी है, और ब्लॉग लिखने का यह मेरा पहला प्रयास है.
मेरे साथी और मैं दीपावली के आस पास ७ ज्योतिर्लिंग की यात्रा पर जाने की योजना बना रहे हैं। क्या होता है और कैसे यह प्रभु इच्छा पर निर्भर करता है। मेरा यह दृढ़ विश्वाश है की जीवन के कार्य प्रभु कृपा से ही होते हैं।
देशाटन का भावः तो मन में था ही , तीर्थाटन के समावेश से पुण्य लाभ प्राप्ति भी हो, ऐसी प्रेरणा प्रभु कृपा से हुई.
मन में विचार आया की कार से देश भर की यात्रा की जाय। कुछ प्रेमी बंधुयों से बात की और मिल गए दो साथी। साथ में मेरे परिवार के पुराने ड्राईवर राम कुमार तो है ही.
आज आपने साथियों के साथ पहली बार विस्तृत चर्चा हुई - यात्रा के विषय मैं।
इस ब्लॉग के माध्यम से आप भी हमारे सहयात्री बने, इसी भावः से मैं आप लोगों का परिचय हम सब से करवाता हूँ.
आज केवल इतना ही. आगे और इस ब्लॉग पर मैं अपनी यात्रा का विवरण पोस्ट करता रहूँगा।
ईति
मेरा नाम भरत जोशी है, और ब्लॉग लिखने का यह मेरा पहला प्रयास है.
मेरे साथी और मैं दीपावली के आस पास ७ ज्योतिर्लिंग की यात्रा पर जाने की योजना बना रहे हैं। क्या होता है और कैसे यह प्रभु इच्छा पर निर्भर करता है। मेरा यह दृढ़ विश्वाश है की जीवन के कार्य प्रभु कृपा से ही होते हैं।
देशाटन का भावः तो मन में था ही , तीर्थाटन के समावेश से पुण्य लाभ प्राप्ति भी हो, ऐसी प्रेरणा प्रभु कृपा से हुई.
मन में विचार आया की कार से देश भर की यात्रा की जाय। कुछ प्रेमी बंधुयों से बात की और मिल गए दो साथी। साथ में मेरे परिवार के पुराने ड्राईवर राम कुमार तो है ही.
आज आपने साथियों के साथ पहली बार विस्तृत चर्चा हुई - यात्रा के विषय मैं।
इस ब्लॉग के माध्यम से आप भी हमारे सहयात्री बने, इसी भावः से मैं आप लोगों का परिचय हम सब से करवाता हूँ.
- हमारे दल के पहले सदस्य हैं - पंडित गोपाल मिश्रा जी. मूलतः पंडितजी मथुरा के पास बरसाना से हैं।
- दूसरे सदस्य हैं श्री राधे श्याम बोहरा। वर्त्तमान में उदयपुर में कर सलाहकार हैं (Tax Consultant).
- तीसरे सदस्य हैं, हमारे परिवार के पुराने ड्राईवर राम कुमार
- दल का चौथा सदस्य में स्वयं हूँ :-)
आज केवल इतना ही. आगे और इस ब्लॉग पर मैं अपनी यात्रा का विवरण पोस्ट करता रहूँगा।
ईति
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