पहली यह की ठहरना धर्मशाला / सामुदायिक भवन / स्थानीय परिवार के साथ ही है। मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्वयंसेवक हूँ, "भारत" से जुड़ने जा रहा हूँ। होटल में तो कार्यवश ठहरता ही हूँ, अब भी होटल में ठहर कर "इंडिया" वासी नहीं रहना चाहता।
यही बात भोजन के सम्बन्ध में भी है। यथा सम्भव, स्थानीय भोजन ही करें, ऐसी सोच है।
वेशभूषा - तीनो मित्र धोती कुरता ही पहनेंगे, यह सोचा है। मुझे और पंडितजी को तो धोती बाँधने का अभ्यास है, पर बोहरा जी ने यज्ञोपवित संस्कार के बाद कभी धोती पहनी हो, ऐसा उन्हें ध्यान नहीं है। उन्हें धोती बांधना सिखाने का दायित्व पंडितजी ने लिया है। :-) यह तो फोटो खींचने लायक है.
आगे हरी इच्छा / हरी कृपा
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