गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा विरचित "श्री रुद्राष्टकम", श्री राम चरित मानस में है। ऐसी मान्यता है की श्री रुद्राष्टकम के पाठ से संताप का नाश होता एवं मानसिक शान्ति प्राप्त होती है।
यह मेरा अनुभूत प्रयोग भी है। २००५ के दौरान एक समय आया जब लगा की जीवन के हर पहलु में ही समस्यायें आने लगीं। मेरे पिताजी एवं हमारे परिवार के हितैषी और मित्र डॉ श्रीकांत एकबोटे ने मुझे सलाह दी में नित्य श्री शिवजी का माला जाप एवं पाठ करुँ ।
मुझे आशातीत परिणाम मिले, एवं मेरा मानसिक संतुलन बना रहा, ऐसी प्रभु कृपा मुझ पर हुई।
हमारे परिवार में वैष्णव परम्परा चली आ रही है। मैंने अपने पिताजी को, दादाजी को सदैव श्री कृष्ण पूजा करते ही देखा है। एकबोटे अंकल के कहने से पहले, मैं श्री शिवजी की पूजा अर्चना नहीं करता था। मतलब, मन्दिर इत्यादि में तो करता था पर घर पर नहीं।
मेरी बुद्धि छोटी है। उसका ही दोष है।
श्री शिवजी की आरती में एक पंक्ति आती है,
"ब्रह्म विष्णु सदाशिव, जानत अविवेका,
प्रणव अक्षर के मध्ये, ॐ अक्षर के मध्ये , यह तीनो एका"
इस पंक्ति से मेरी बुद्धि का यह दोष जाता रहा।
नीचे एक लिंक दे रहा हूँ, जिसके माध्यम से आप श्री रुद्राष्टकम एवं अंग्रेजी अनुवाद पढ़ सकते हैं.
http://www.stutimandal.com/gif_tulsi/rudrashtakam.htm
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